अहसास : जब सपने वाकई सच हो जाए !!
18/10/2017 -वो उस टूर्नामेंट का आखिरी राउंड था ,एक कोच के तौर पर काफी तनाव भरा ,दरअसल ये वह मौका था जब आप सिर्फ बैठ कर परिणाम के आपके पक्ष में आने की उम्मीद कर सकते है और वह इंतजार का समय बहुत मुश्किल वक्त में से एक था ,खासतौर पर उस इंसान के लिए जिसने शतरंज के खेल में खुद श्रेष्ठता हासिल ना की हो और ऐसे में ना सिर्फ हर कोई बल्कि वह स्वयं उसे अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखना मुश्किल होता है ,पर उस दिन परिणाम मेरी आंखो में पानी लेकर आया मेरे द्वारा प्रशिक्षित किए हुए अंशुमान सिंह नें विश्व स्कूल चैंपियनशिप 2009 के अंडर 7 आयु वर्ग का कांस्य पदक अपने नाम कर लिया था वह दौड़कर मेरी तरफ आया तो माना ऐसे लगा जैसे मैं खुद समय में बहकर पदक लेकर आ रहा हूँ ,उस दिन समझ आया दुनिया में खुशी सिर्फ कुछ खुद हासिल करने से नहीं मिलती बल्कि आपकी वजह से अगर कोई ओर भी सफलता पा सके तो यह किसी मायने में कम नहीं होती । 2017 में राष्ट्रीय विजेता बने सायना इंटरनेशनल स्कूल में ,मैं वर्ष 2007 से शतरंज प्रशिक्षक के तौर पर कार्य कर रहा हूँ पढे सपनों के सच होने का यह सफर ..