मन के हारे हार है , मन के जीते जीत !!
09/06/2017 -मन के हारे हार है मन के जीते जीत , यह बात आपने मैंने बचपन में कई बार सुनी है , एक खिलाड़ी के जीवन में इस से जुड़ी परस्थिति का सामना हमें लगभग रोज ही करना होता है , तो जब आपका मैच किसी बड़े खिलाड़ी से पड़ता है तो आप क्या सोचते है ,तो आप क्या करते है यह बात मैच के परिणाम के लिए कितने मायने रखती है ? क्या खुद को कमजोर समझने वाला ,सामने वाले को ताकतवर समझने वाले के बीच मैच खेलने की जरूरत भी रह जाती है ? क्या वह मैच एक औपचारिकता नहीं लगने लगता ,जैसे मन पहले ही कह देता है यह मैच तो हारना ही था ,क्या यह रवैया हमें वाकई एक खिलाड़ी होने के असली फायदे देता है , पढे सागर शाह को यह लेख जिसमें एक खिलाड़ी सामने वाले से पहले खुद से जीतने का कारनामा करता है .. वाकई प्रेरक